A ENTLIGENT GIRL...
एक लड़की हमेशा सोचती थी कि हमेशा एक होशियार इंसान ही आगे चलकर कुछ बन सकता है सोचती कि मैं तो वैसे ही कमजोर हूं मैं तो कुछ बन ही नहीं सकती वह हमेशा अपने सपनों को नकार देती थी और बोलती थी मैं कुछ नहीं कर सकती तब उसकी टीचर ने यह बात सुन ली और उसे समझाया बेटा ऐसा कुछ नहीं होता यह हमारे मन का वहम है अगर हम मान ले कि हम कमजोर हैं तो हम कमजोर ही रहेंगे और लोग हमें नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे हमें हमेशा यही ध्यान में रखकर उस काम को करना चाहिए कि मैं इस काम को पूरी तरह से निष्ठा से निभा सकती हूं यह सुनकर वह लड़की सोची क्या ऐसा भी हो सकता है तब उसने ठान लिया कि वह जो भी काम करेगी उसे सच्चाई और ईमानदारी से करेगी कुछ सालों बाद उस टीचर का रिटायरमेंट हो रहा था बड़ी धूमधाम से तभी वहां एक लंबी सी गाड़ी आती है और उस गाड़ी के चारों तरफ पुलिस की गाड़ियां होती है तभी उस गाड़ी से एक लड़की निकलती है उसने काला कोट पहना हुआ था और वह एक कलेक्टर थी वह लड़की उस टीचर के पैर छूती है तब टीचर ने पूछा अरे कलेक्टर जी आप मेरे ऐसे पैर क्यों छू रहे हो आप कौन हो तब वह लड़की जवाब देती है कि टीचर मैं वही लड़की हूं जिसे आपने वह बात कही थी कि अगर कोई व्यक्ति किसी काम को ईमानदारी से करें और उसे निष्ठा से निभाए तो वह पूरा होकर ही रहता है तब मैंने वह बात उसी दिन मान ली थी और उसी दिन ठान लिया था कि मैं एक दिन बहुत बड़ी बनूंगी.
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा कभी भी हार नहीं माननी चाहिए अपने काम को निष्ठा से पूरा करना चाहिए थैंक यू।
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